
सूरज को मोमबत्ती कब तक कहो दिखाऊँ
तू ही बता दे प्यारे कैसे तुझे रिझाऊँ
तू ही बता दे प्यारे कैसे तुझे रिझाऊँ
तू ही है बाग बगिया, तू ही है फूल फल भी
तोडूँ क्यों तुझको तुझ से, अब भेंट क्या चढाऊं
तू ही बता दे प्यारे कैसे तुझे रिझाऊँ ...
सब और तू ही तू है सब में है नूर तेरा
सब के चरण में अपना सिर क्यों न मैं झुकाऊँ
तू ही बता दे प्यारे .......
गंगा का जल उठाकर वापिस उडेलता हूँ
मैं भी तुझे समर्पित तब और क्या रचाऊँ
तू ही बता दे प्यारे ......
मुह पर हँसी का लेबल, दिल में है दर्द ढेरों
तू जानता है दिल की फिर अश्क क्या बहाऊँ
तू ही बता दे प्यारे ........
सांसों में नाम तेरा, धड़कन में तान तेरी
सुरेश चंद अपना फिर गीत क्या सुनाऊं
तू ही बता दे प्यारे कैसे तुझे रिझाऊँ
सूरज को मोमबत्ती कब तक कहो दिखाऊं
तू ही बता दे प्यारे कैसे तुझे रिझाऊँ
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