
जहरीले कुओं के आगे मैं प्यास लिए घूमा हूँ
सूखी बंजर धरती पर भी मैं आस लिए घूमा हूँ
हर उत्सव के हिस्से का विष कबसे पीता आया हूँ
धोखेबाजों की बस्ती में विश्वास लिए घूमा हूँ
सूखी बंजर धरती पर भी मैं आस लिए घूमा हूँ
हर उत्सव के हिस्से का विष कबसे पीता आया हूँ
धोखेबाजों की बस्ती में विश्वास लिए घूमा हूँ
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