यह जीवन घुटन हुआ भइया
तोतों ने जंगल को छोड़ा
पंखों ने नभ नाता तोडा
दाने पानी की खातिर ही
पिंजरों से नव रिश्ता जोड़ा
माती से कटने लगे सभी
उल्टा चलन चला भैया
यह जीवन घुटन हुआ भैया
अंधे कूपों से भरी धरा
काले गह्वर सी हुई दिशा
गगन हो गया गूंगा बहरा
ये जीवन इनके बीच फंसा
चिडिया सी हँसी के बदले में
नभ जितना रुदन मिला भइया
ये जीवन घुटन हुआ भइया
ह्त्या कोई ख़बर नहीं
हर तरफ़ जहर भी जहर नहीं
वृक्षों पर काले धुएँ का
है कहर मगर अब कहर नहीं
नदियों का भारत, अब गंदे
नालों का मिलन हुआ भइया
ये जीवन घुटन हुआ भइया
यह ढोंग रचाया बोनों ने
षडयंत बनाया बोनों ने
चाबी बोनों के हाथ थमा
कद वाले खड़े खिलोनो से
चुपचाप तमाशा देख रहे
कैसा पतन हुआ भइया
ये जीवन घुटन हुआ भइया
हैं नागफनी के चक्रव्यूह
लोगों के कई कई गुए मुहं
हैं नया व्याकरण लाड रहे
फूलों पर काँटों के समूह
विज्ञापन के बल मौसम में
बतियाना कठिन हुआ भइया
यह जीवन घुटन हुआ भइया
(५-५-८९ को लिखा गया गीत)
Sunday, September 27, 2009
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