Sunday, September 6, 2009

एक प्रेम गीत


राह में मेरी खड़े जो नागफन के झाड़ थे
पर निकल उन पर हैं आए आज क्यों सुरखाब के
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने

क्यों नहीं मुझको जलाती रास्ते की आग भी
इन्द्रधनुषी लग रहें हैं क्यों शहर के काग भी
जब से तुम चलने लगे हो मीत मेरे साथ में
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने

रूप सागर सामने मेरे खड़ा कहने लगा
क्यों न मुझको बांह में अब ओ कवि तू ले उठा
आज थोडी देर बैठे आप मेरे सामने
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने

गाढ़ दो जो शुष्क टहनी आप सूखे रेत में
वो बदल जायेगी बस यूँ लहलहाते खेत में
मीत तुम मुझको संभालो आज अपने हाथ से
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने

हैं नयन खंजन युगल या दीप मन्दिर में जले
चांदनी सी हथेलियों में प्यार के हैं घोंसले
भूल जाए दर्द भी दुःख मीत तेरे सामने
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने

रह में मेरी खड़े जो नागफन के झाड़ थे
पर नुकल उन पर हैं आए आज क्यों सुरखाब के
कौन ला जादू प्रिये मेरी चलाया आपने

9 comments:

  1. ओह, एक पक्षी देखने वाले के ब्लॉग पर आना कितना सुखद है। सुरेश जी आप पक्षियों पर हिन्दी में लिखें न!
    मेरे पास गंगा तट पर अनेक पक्षी हैं, पर मेरे पास बढ़िया कैमरा नहीं उन्हें कैप्चर करने को!

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  2. बहुत ही सुन्दर लगी यह कविता ।


    आपका स्वागत है......

    गुलमोहर का फूल

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  3. आप हिंदी में लिखने चले हैं और परिचय अंग्रेजी में दे रहे हैं। मेरे चिड़िया देखने वाले भाई, यह तो हम लोगों पर जुल्म है। चिड़िया हिंदी में देखें और लिखें। इन बातों को अन्यथा न लीजिएगा लेकिन अगर आप हरियाणवी में ब्लॉग बनाते और भी मजा आता। अरे भाई क्षेत्रीय भाषा भी तो अपनी ही है।
    समय निकालकर मेरे ब्लॉग पर भी आएं और जानें ब्लॉगिंग की दुनिया को।

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  4. बहुत खूब
    बात दिल को छू गयी है

    सुंदर रचना के साथ स्वागत है

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  5. बहुत खूब, अच्छा लिखा है | अच्छा लगा पढ़कर | बधाई |

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  6. Shri Gyan Dutt Pandey ji,
    Hindi mein likha hai pakshiyon par bhi. Lekin mera man ab varn-shankar ho haya hai.... angreji+hindi+urdu+punjabi+aur bhi bahut kuchh.
    Laachaari hai, Panditji.

    Yogesh Swapn ji, dhanyavad.

    Jha Sahib, aabhaari hun.

    Yusuf Kirmani ji, aapki baat 100% sach hai. Sab apne hai hain, paraya koi bhi nahin. Main to bas ek pakshi ki tarah gata hun, koi sun le to uski meharbaani. Ab pakshi ki kya juban! Sari dunia hamari hai, agar 'garj' khatm ho jai, sirf 'farj' rah jai to. samay samay par daante raha kare.

    Narad ji, 'sarvam idam vasudevam'

    Vipin Bihari Goyal ji, jaankar achha laga.

    Hitendra Kumar Gupta ji, jarur koshish karunga.

    Shagird-e-rekhta ji, dhanyavad.

    Suresh C Sharma

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