
राह में मेरी खड़े जो नागफन के झाड़ थे
पर निकल उन पर हैं आए आज क्यों सुरखाब के
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
क्यों नहीं मुझको जलाती रास्ते की आग भी
इन्द्रधनुषी लग रहें हैं क्यों शहर के काग भी
जब से तुम चलने लगे हो मीत मेरे साथ में
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
रूप सागर सामने मेरे खड़ा कहने लगा
क्यों न मुझको बांह में अब ओ कवि तू ले उठा
आज थोडी देर बैठे आप मेरे सामने
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
गाढ़ दो जो शुष्क टहनी आप सूखे रेत में
वो बदल जायेगी बस यूँ लहलहाते खेत में
मीत तुम मुझको संभालो आज अपने हाथ से
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
हैं नयन खंजन युगल या दीप मन्दिर में जले
चांदनी सी हथेलियों में प्यार के हैं घोंसले
भूल जाए दर्द भी दुःख मीत तेरे सामने
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
रह में मेरी खड़े जो नागफन के झाड़ थे
पर नुकल उन पर हैं आए आज क्यों सुरखाब के
कौन ला जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
पर निकल उन पर हैं आए आज क्यों सुरखाब के
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
क्यों नहीं मुझको जलाती रास्ते की आग भी
इन्द्रधनुषी लग रहें हैं क्यों शहर के काग भी
जब से तुम चलने लगे हो मीत मेरे साथ में
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
रूप सागर सामने मेरे खड़ा कहने लगा
क्यों न मुझको बांह में अब ओ कवि तू ले उठा
आज थोडी देर बैठे आप मेरे सामने
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
गाढ़ दो जो शुष्क टहनी आप सूखे रेत में
वो बदल जायेगी बस यूँ लहलहाते खेत में
मीत तुम मुझको संभालो आज अपने हाथ से
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
हैं नयन खंजन युगल या दीप मन्दिर में जले
चांदनी सी हथेलियों में प्यार के हैं घोंसले
भूल जाए दर्द भी दुःख मीत तेरे सामने
कौन सा जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
रह में मेरी खड़े जो नागफन के झाड़ थे
पर नुकल उन पर हैं आए आज क्यों सुरखाब के
कौन ला जादू प्रिये मेरी चलाया आपने
ओह, एक पक्षी देखने वाले के ब्लॉग पर आना कितना सुखद है। सुरेश जी आप पक्षियों पर हिन्दी में लिखें न!
ReplyDeleteमेरे पास गंगा तट पर अनेक पक्षी हैं, पर मेरे पास बढ़िया कैमरा नहीं उन्हें कैप्चर करने को!
wah , umda. blog jagat men swagat.
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर लगी यह कविता ।
ReplyDeleteआपका स्वागत है......
गुलमोहर का फूल
आप हिंदी में लिखने चले हैं और परिचय अंग्रेजी में दे रहे हैं। मेरे चिड़िया देखने वाले भाई, यह तो हम लोगों पर जुल्म है। चिड़िया हिंदी में देखें और लिखें। इन बातों को अन्यथा न लीजिएगा लेकिन अगर आप हरियाणवी में ब्लॉग बनाते और भी मजा आता। अरे भाई क्षेत्रीय भाषा भी तो अपनी ही है।
ReplyDeleteसमय निकालकर मेरे ब्लॉग पर भी आएं और जानें ब्लॉगिंग की दुनिया को।
wah!narayan narayan
ReplyDeleteबहुत खूब
ReplyDeleteबात दिल को छू गयी है
सुंदर रचना के साथ स्वागत है
बहुत खूब, अच्छा लिखा है | अच्छा लगा पढ़कर | बधाई |
ReplyDeleteShri Gyan Dutt Pandey ji,
ReplyDeleteHindi mein likha hai pakshiyon par bhi. Lekin mera man ab varn-shankar ho haya hai.... angreji+hindi+urdu+punjabi+aur bhi bahut kuchh.
Laachaari hai, Panditji.
Yogesh Swapn ji, dhanyavad.
Jha Sahib, aabhaari hun.
Yusuf Kirmani ji, aapki baat 100% sach hai. Sab apne hai hain, paraya koi bhi nahin. Main to bas ek pakshi ki tarah gata hun, koi sun le to uski meharbaani. Ab pakshi ki kya juban! Sari dunia hamari hai, agar 'garj' khatm ho jai, sirf 'farj' rah jai to. samay samay par daante raha kare.
Narad ji, 'sarvam idam vasudevam'
Vipin Bihari Goyal ji, jaankar achha laga.
Hitendra Kumar Gupta ji, jarur koshish karunga.
Shagird-e-rekhta ji, dhanyavad.
Suresh C Sharma
aap tp chupe rustam nikle
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