
पेङो के तो कान उमेठे
सूखे पत्तों को दोङाया
पोखर में खलबली मचा दी
लहरों को क्या खूब नचाया
पहले मेरा माथा चूमा
फिर बालों को भी सहलाया
पीपल ने तालियाँ बजाई
शीशम ने झुनझुना बजाया
सूखे पत्तों को दोङाया
पोखर में खलबली मचा दी
लहरों को क्या खूब नचाया
पहले मेरा माथा चूमा
फिर बालों को भी सहलाया
पीपल ने तालियाँ बजाई
शीशम ने झुनझुना बजाया
प्रकृति का सुन्दर नृत्य ।
ReplyDeleteशर्मा जी कमाल कर दिया आप ने आप तो गज़ब के कवि निकले कभी इधर भी नज़र दौड़ा ले
ReplyDeletehttp://manhan.wordpress.com
http://krishnakumarmishra.blogspot.com
http://dudhwa.blogspot.com
Mishra ji,
ReplyDeleteAap ka swagat hai.
Saabhaar,
Suresh
Priya Chandan Kumar Jha ji,
ReplyDeleteSa-dhanyavad,
aapka]
Suresh